हम हिंदुस्तानियों कि अक्ल क्या वास्तव में नहीं चलती ? हमने अंग्रेजो को बंदरगाह से शहर, शहर से राज्य, राज्य से राजमहल और राजमहल से सीधे देश का शासक बनने का मौका दिया, यही मौका हमने पाकिस्तान एवं चीन को दिया और यही मौका अब इन् बाबाओ को दे रहे हैं जो दुनिया का सबसे आसान काम करते है, दूसरों को नसीहत देने का! एक यही काम है जिसमे न कुछ मेहनत होती है और न ही कुछ रकम लगनी होती है! श्री राम को वनवास के दौरान आई कठिनाइयों का बखान करने वाले ये संत खुद विलासिता का जीवन गुजारते है vkSj gesa uSfrdrk dk ikB i<+krs jgrs gSA chrs fnuksa ppkZ esa vkbZ ,d dyadxkFkk ds ckjs esa tkudj mlds iz.ksrk ls T;knk HkqDrHkksxh ds ifjtuksa ij dzks/k vk;kA ;g <+ksaxh rks ekSds dh ryk”k djrs gh jgrs gS ij ge [kqn D;wa budk fuokyk cuus dks izLrqr gks tkrs gSA क्या वो माँ-बाप बिलकुल ही अंधे हो गए थे कि उनकी ठीक आँखों के सामने बंद कमरे में कोई बाबा उनकी बच्ची के साथ अकेला है ये कैसे गवारा भी हुआ उन्हेंये समझ के परे है,हमारे साथ यही समस्या सदियों से चली आ रही है कि हम भगवान को उतना नहीं मानते जितना कि उनकी बखान करने वालो को,समय समय पर आसाराम बापू के कई अमर्यादित भाषण या यु कहे सत्संगी विचार सामने आते रहे है आचरण से तो वो घोर अड़ियल और भावनाशून्य ही दीखते थे जिस सन्यासी कि भाषा में ही उग्रता हो वो इश्वर के करीब तो नहीं हो सकता ये वाणी कि सौम्यता ही है कि मंदिरों में राम कि पूजा होती है उग्र रावण कि नहीं........
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