Friday, 10 May 2013

बचपन की मीठी यादें


बचपन की मीठी यादें 


याद आता है वह सुहाना बचपन, 
मीठी यादें और वो पागलपन। 
हंसी ठिठोली सखियों के साथ, 
काश लौट आए वो दौर, फिर से आज। 

जीना चाहती हूँ सब, फिर एक बार। 
जो सपने बचपन में रह गये अधूरे, 
काश उनको कर पाऊँ मैं, साकार। 
आ जाये जिन्दगी में यादों की बहार। 

माँ का लाड-प्यार से भरा हाथ, 
बाबू जी की मीठी फटकार। 
किया मेरी बहन ने मुझे 
अपनी शैतानियों से तंग, 
पर बड़ा भाई रहा हमेशा मेरे संग। 

वह दिन-भर खेलना दौड़म-भाग, 
घर आकर गाना माँ से सिर्फ एक राग। 
थकी बहुत हूँ माँ मैं आज, 
फिर कभी कर लूंगी पढ़ाई का काम-काज। 

दिल में था सबके लिए सिर्फ प्यार। 
माँ-बाप से जुड़े थे दिल के तार। 
ईश्वर से है बस, एक ही गुहार। 
बच्चे फिर करने लगें माँ-बाप का आदर सत्कार। 

काश! मिट जाये भेदभाव का विचार। 
और बच्चों से लेकर सीख बड़े लायें, 
अपने अंदर कुछ सुधार। 
भर लें अपने मन में सिर्फ प्यार।

सिदराह जमाल, कक्षा- 9 
लामार्टीनियर्स गर्ल्स कॉलेज,
 लखनऊ   




2 comments:

Unknown said...

Very Touchy poem, Keep it up

Shiva said...

nice and touching..........